
सूरत। दक्षिण गुजरात के बागवानी उत्पादों की वैश्विक बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष आम के सीजन में वलसाड के प्रसिद्ध हापुस और केसर आमों ने यूरोप और खाड़ी देशों सहित 21 देशों में अपनी खास पहचान बनाई। इसके साथ ही क्षेत्र की सब्जियों और अन्य फलों का निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जिससे किसानों को बेहतर दाम और नई बाजार संभावनाएं मिली हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से 30 जून 2026 के दौरान दक्षिण गुजरात के सूरत, वलसाड, नवसारी, तापी, भरूच, नर्मदा और डांग जिलों से 181 मीट्रिक टन से अधिक आम का निर्यात किया गया। इनमें केसर, हापुस, राजापुरी, तोतापुरी, बदामी, दशहरी और लंगड़ा किस्मों के आम शामिल रहे। इनकी आपूर्ति कनाडा, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), स्वीडन, स्पेन, आयरलैंड, कतर, बेल्जियम, इटली, फ्रांस और तुर्किये समेत कुल 21 देशों में की गई।
वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान दक्षिण गुजरात से 3,432 मीट्रिक टन से अधिक सब्जियों और अन्य फलों का भी निर्यात हुआ। भिंडी, मिर्च, लौकी, करेला, तुरई, गलका, हल्दी, पापड़ी और टिंडोरा जैसी फसलों की मांग अमेरिका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, जापान, ओमान, तंजानिया, थाईलैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में बनी रही। तापी जिले का डोलवण क्षेत्र भिंडी और मिर्च के निर्यात का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
गुणवत्ता ने बढ़ाई वैश्विक मांग
अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता नियंत्रण और फाइटोसैनिटरी मानकों के अनुरूप उत्पादन के कारण दक्षिण गुजरात के कृषि उत्पादों की स्वीकार्यता विदेशी बाजारों में बढ़ी है। इसका सीधा लाभ किसानों को बेहतर कीमत के रूप में मिल रहा है।
सरकार दे रही निर्यात को बढ़ावा
राज्य सरकार बागवानी फसलों के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए समुद्री और हवाई परिवहन सहायता के साथ इर्रेडिएशन प्रक्रिया पर भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। इससे निर्यातकों और किसानों को वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान हो रही है।
किसानों के लिए जरूरी जानकारी
बागवानी उत्पादों का निर्यात करने के इच्छुक किसानों को APEDA के HortiNet पोर्टल पर अपने फार्म का पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए संबंधित जिला बागवानी कार्यालय में आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। साथ ही निर्यात के लिए निर्धारित गुणवत्ता और फाइटोसैनिटरी मानकों का पालन अनिवार्य है।



