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सूरत जलभराव पर AAP का भाजपा पर हमला, कहा- यह प्राकृतिक आपदा नहीं, सरकार की विफलता

मनोज सोरठिया का दावा- तीन साल से स्टॉर्म ड्रेनेज लाइनों की सफाई नहीं हुई, 2006 की बाढ़ रिपोर्टों के सुझावों की अनदेखी का आरोप

अहमदाबाद/सूरत। आम आदमी पार्टी (AAP) ने सूरत में हालिया जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया, प्रदेश उपाध्यक्ष राम धडुक और प्रदेश संगठन मंत्री धर्मेश भंडेरी ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया कि यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सरकार की लापरवाही और गलत नीतियों का परिणाम है।

मनोज सोरठिया ने कहा कि 6 और 7 जुलाई को हुई पहली ही बारिश में सूरत के अधिकांश इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। घरों, दुकानों और बेसमेंट में पानी भर गया, जो कई दिनों बाद भी पूरी तरह नहीं निकला। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में 40 से अधिक लोगों की मौत हुई और करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 की बाढ़ के बाद गठित विभिन्न समितियों, फ्लड विभाग, आईआईएम अहमदाबाद और विश्व बैंक की रिपोर्टों में शहर की ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने, स्टॉर्म वॉटर लाइनें विकसित करने, खाड़ियों का चौड़ीकरण एवं गहरीकरण, तालाबों के संरक्षण और बेहतर शहरी नियोजन जैसे सुझाव दिए गए थे, लेकिन 20 वर्षों में उन पर प्रभावी अमल नहीं हुआ।

सोरठिया ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से सूरत की स्टॉर्म ड्रेनेज लाइनों की सफाई तक नहीं कराई गई। उनका कहना था कि प्री-मानसून तैयारियों के बजाय भाजपा नेतृत्व राजनीतिक खींचतान में व्यस्त रहा, जिससे शहर को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले दो दशकों में जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने के बजाय शहर की कीमती जमीनों के सौदों और विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार पर अधिक ध्यान दिया गया। उनके अनुसार, वर्ष 2007 में ऑक्ट्रॉय समाप्त होने के बाद सूरत को मिलने वाली ग्रांट का पूरा हिस्सा भी नहीं मिला और शहर के विकास के साथ अन्याय हुआ।

AAP नेता ने कहा कि बाढ़ के बाद जनप्रतिनिधि केवल औपचारिक दौरे कर रहे हैं, जबकि प्रभावित लोगों को वास्तविक राहत नहीं मिल रही। उन्होंने सूरत की स्थिति को “भाजपा द्वारा पैदा की गई त्रासदी” बताते हुए सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि जनता अब जवाब चाहती है।

पार्टी ने सरकार से बाढ़ प्रबंधन, ड्रेनेज व्यवस्था और शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

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