धर्म- समाज

विश्वास अचल,शितल और धवल होना चाहिये, आग्रहमुक्त संग्रह बहूत बडी समस्याओं का उकेल है

व्यासगुफा बदरीनाथ धाम से ८९७वीं रामकथा का शुभारंभ

व्यास आदि कविपुंगव नाना।
जिन्ह सादर हरि सुजस बखाना।।ब्यास आदि कविबर्ज बखानी।कागभुशुंडि गरुड के ही की।।

इन पवित्र पंक्तियों के साथ उत्तराखंड के हिमालय के उतुंग शिखर बद्रीनाथ धाम के निकट व्यास गुफा के सानिध्य में माना गांव के पास क्रम ८९७वीं कोरोना नियमो का चुस्त पालन करते हुए क्रम में रामकथा का प्रारंभ करते हुए आज निमित्त मात्र यजमान नरेश पटेल और उषा बेन पटेल का परिवार एवं ज्योतिष पीठाधीश्वर और द्वारकाधीश पीठाधीश्वर स्वरूपानंद जी के शिष्य मुकुलानंद जी ब्रह्मचारी और संतराम मंदिर गुजरात के महंत रामदासजी के शिष्य और सेवक गण एवं बद्री- केदारनाथ के महंत पितांबरदास जी और वहां के उपाध्यक्ष किशोर पवार जी और माणा गांव के मुखिया जी और बहुत से संत महंत की उपस्थिति में दीप प्राक़त्य के बाद कथा का आरंभ हुआ।

बापू ने बताया कि भगवान बद्री विशाल,नर- नारायण भगवान और महर्षि वेदव्यास, सरस्वती और अलकनंदा का संगम और आदि शंकराचार्य जी की असीम कृपा से व्यासपीठ को आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।करीब १४ साल के बाद फिर यहां पर आए।। वैसे मानस नर-नारायण विषय पर बोलना था लेकिन यहां व्यास गुफा और व्यास का विस्तार है तो मानस व्यास गुफा के विषय पर हम संवाद करने जा रहे हैं।

बापू ने कहा कि रामचरितमानस में तीन बार व्यास शब्द का उल्लेख मिलता है।। यहां हम नव बिंदु को स्पर्श करेंगे जैसे गुरु कृपा से हम व्यास विद्या के बारे में संवाद करेंगे: वैसे हमारे यहां अध्यात्म विद्या,ब्रह्म विद्या,वेदविद्या है लेकिन एक व्यासविद्या भी है अभी तक क्यों स्पर्श नहीं हुआ!गुरु कृपा बोलेगी, मेरे तो सिर्फ होठ हिलेंगे!और व्यास विवेक के बारे में भागवत महाभारत ब्रह्मसूत्र जहां से भी मिले।

व्यास विचार-जैसे पांडुरंग दादा ने ऐसा एक ग्रंथ भी लिखा है वह भी बापू ने याद किया व्यास विश्वास के बारे में भी बोलेंगे बापू ने कहा कि विश्वास सदैव श्वेत धवल होना चाहिए अंध नहीं होना चाहिए। उज्जवल होना चाहिए। विश्वास के ३ लक्षण है: वह चलित नहीं विश्वास अचल होना चाहिए,और विश्वास शीतल होना चाहिए, उग्र नहीं। हिमालय के उत्तुंग शिखर कैलाश पर भगवान विश्वनाथ स्वयं विश्वास बैठे हैं।तीनों लक्षण वहां हमें मिलते हैं।

बापू ने कहा कि हम व्यास विराग के बारे में कहेंगे भारत के बारे में बापू ने बताया कि भारत विश्व गुरु था विश्व गुरु है और विश्व गुरु रहेगा। जिस गंगा को जटा में समेटे है उसे चंद बिजलिया कहती है कि यह फवारा है! बापू ने कहा कि सब दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।

व्यास विनोद के बारे में भी पुराणों की गलियों में जाकर मधुर और सुचारू विनोद भी हम देखेंगे। व्यास की विशालता व्यास विद्रोह और व्यास विशेष-जैसे तप आदि विशेषताएं ऐसे ९ बिंदुओं को हम इन दिनों में स्पर्श करेंगे।।
और मानस का संवाद करेंगे व्यास विद्या किसे कहते हैं?बापू ने कहा कि विद्या वह है जो शक्ति से भर दे।

आज की विद्या हमें निराश करती है डीप्रेस करती है।आग्रह मुक्त संग्रह बहुत बड़ी समस्या का उकेल है । वह हमें विद्या सिखाती है इंद्रियों को स्वाधीनता प्रदान करें वह विद्या। हमें निज सुख का वरदान दे वह विद्या। जो विद्या विश्व का कल्याण करें और जो प्रेम और भाव को प्रतिदिन विस्तार करें वह विद्या है।।ऐसी विद्या के बारे में जो व्यास विद्या कहते हैं हम आए दिन संवाद करेंगे।

और फिर रामचरितमानस के महात्म्य और वंदना प्रकरण के बारे में सभी की वंदना करके हनुमंत तत्व की वंदना के बाद आज की कथा को विराम दिया गया।।कल से कथा सुबह १०:०० बजे शुरू होगी।।

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