
सूरत। सूरत महानगरपालिका की विभिन्न समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक हलचल चरम पर पहुंच गई है। आगामी 30 जून को आयोजित होने वाली महानगरपालिका की सामान्य सभा में इन समितियों के पदाधिकारियों के नामों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
इससे पहले मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति अध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों की नियुक्ति में आंतरिक खींचतान के चलते काफी देरी हुई थी। उस दौरान स्थानीय नेताओं की तुलना में प्रदेश नेतृत्व की पसंद को अंतिम मंजूरी मिली थी। अब प्रमुख पदों के गठन के एक महीने बाद अन्य समितियों के गठन को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
समितियों में अध्यक्ष बनने के लिए गांधीनगर तक लॉबिंग
30 जून की सामान्य सभा उन पार्षदों के लिए प्रतिष्ठा की आखिरी बड़ी परीक्षा मानी जा रही है, जिन्हें प्रमुख पदों में स्थान नहीं मिला था। ऐसे में दावेदारों ने गांधीनगर तक डेरा डाल दिया है और अपने राजनीतिक प्रभाव तथा पार्टी के प्रति समर्पण के आधार पर पद हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
एक ओर वरिष्ठ और अनुभवी पार्षद अपने राजनीतिक वजन के सहारे दावेदारी मजबूत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर नए और उत्साही चेहरों को मौका दिलाने के लिए भी अंदरखाने लॉबिंग तेज हो गई है।
क्या स्थानीय सिफारिशों को मिलेगा महत्व?
सामान्य सभा से पहले राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की पूरी संभावना बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार भी प्रदेश नेतृत्व अपनी पसंद के नामों पर अंतिम मुहर लगाएगा और स्थानीय संगठन को पीछे रहना पड़ेगा, या फिर स्थानीय नेताओं और संगठन की सिफारिशों को महत्व मिलेगा।
इन सवालों के बीच केवल भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ही नहीं, बल्कि पूरे सूरत महानगरपालिका के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की नजर 30 जून की बैठक पर टिकी हुई है।



