
सूरत। पांडेसरा स्थित एक नामी टेक्सटाइल मिल के 61 वर्षीय सीनियर अकाउंटेंट साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने कंपनी के मालिक बनकर व्हाट्सएप पर मैसेज किया और विश्वास में लेकर उनसे दो चरणों में कुल 28 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित अकाउंटेंट असुलेश प्रसाद सेठ 23 जून की सुबह कार्यालय में मौजूद थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर अक्षत नाम के व्यक्ति का मैसेज आया, जिसमें पूछा गया कि क्या वह ऑफिस में बैठे हैं। अकाउंटेंट ने जवाब में हां कहा। मैसेज भेजने वाले का नाम कंपनी के मालिक के नाम से मेल खाने के कारण उन्होंने उसे मालिक का संदेश मान लिया और बातचीत जारी रखी।
इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप के जरिए कंपनी के बैंक खाते में उपलब्ध राशि की जानकारी मांगी। बिना किसी सत्यापन के अकाउंटेंट ने कंपनी की बैंक बैलेंस संबंधी जानकारी और विवरण भेज दिए।
कुछ देर बाद आरोपी ने एक क्लाइंट को 18 लाख रुपये का भुगतान करने की बात कही और बैंक खाता नंबर भेज दिया। अकाउंटेंट ने निर्देशों को सही मानते हुए कंपनी के खाते से RTGS के माध्यम से 18 लाख रुपये संबंधित खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पहला ट्रांजेक्शन होने के बाद आरोपी ने फिर से मैसेज कर उसी क्लाइंट को 10 लाख रुपये और भेजने के लिए कहा। इस पर अकाउंटेंट ने बताया कि कंपनी के खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है। तब ठगों ने उन्हें दूसरी कंपनी के खाते से राशि ट्रांसफर कर भुगतान करने का सुझाव दिया।
आरोपी के निर्देशों पर भरोसा करते हुए अकाउंटेंट ने पहले विक्रम सिंटेक्स कंपनी के खाते से 10 लाख रुपये अपनी कंपनी के खाते में ट्रांसफर करवाए और बाद में वह राशि भी बताए गए बैंक खाते में भेज दी।
बाद में जब पूरे मामले की जांच की गई तो सामने आया कि मैसेज भेजने वाला व्यक्ति कंपनी का मालिक नहीं बल्कि साइबर ठग था। इसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
साइबर विशेषज्ञों की सलाह
केवल व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर वित्तीय लेनदेन न करें।
बड़ी राशि ट्रांसफर करने से पहले संबंधित अधिकारी या मालिक से फोन पर पुष्टि अवश्य करें।
कंपनी की बैंकिंग और वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।



