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गुजरात में बारिश का कहर: नवसारी के चिखली में 2 घंटे में 8 इंच बारिश, वलसाड में NDRF तैनात

गुजरात के 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी

गुजरात में मानसून ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के 172 तालुकों में बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। सबसे अधिक बारिश मांगरोल में दर्ज की गई, जहां 13 इंच बारिश होने से जनजीवन प्रभावित हुआ है।

लगातार बारिश के चलते राज्य की अधिकांश नदियों में नए पानी की आवक हुई है तथा बांधों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। उपलेटा स्थित वेणु-2 डैम के दो दरवाजे 0.3 मीटर तक खोलने पड़े, जबकि जामजोधपुर के उमियासागर डैम के पांच दरवाजे 1.5 मीटर तक खोलकर निचले इलाकों के गांवों को अलर्ट किया गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

वहीं, कड़ी शहर में देर रात करीब दो बजे तेज आंधी और बिजली की गर्जना के साथ महज दो घंटे में लगभग 8 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके चलते 25 से अधिक सोसायटियों में घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया और लोगों को आधी रात में अपने घरों का सामान बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।

आज सुबह भी राज्य के कई जिलों में भारी बारिश जारी रही। सबसे गंभीर स्थिति चिखली में देखने को मिली, जहां सुबह 8 बजे से 10 बजे के बीच केवल दो घंटे में 8 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। तेज बारिश के कारण सड़कों पर नदी जैसा दृश्य दिखाई दिया और कई घरों में कमर तक पानी भर गया।

इसी तरह वलसाड में 6.10 इंच बारिश के बाद शहर के कई हिस्से जलमग्न हो गए हैं। स्थिति को देखते हुए यहां NDRF की टीम को तैनात किया गया है। वहीं सूत्रापाड़ा में भी कई मकान पानी में डूबे नजर आ रहे हैं।

मौसम विभाग ने आज भी राज्य के 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। पांच जिलों में रेड अलर्ट और सात जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार राज्य के ऊपर एक साथ पांच मौसम प्रणालियां सक्रिय होने के कारण आगामी दिनों में भी भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी तेजी से आगे बढ़ेगा। हालांकि भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन जूनागढ़ समेत कई जिलों में किसानों के लिए यह बारिश राहत और खुशी लेकर आई है, क्योंकि खेती और बुवाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो गया है।

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