
सूरत। दक्षिण गुजरात के बाढ़ प्रभावित व्यापारियों को राहत पहुंचाने के लिए लागू ‘सूरत फ्लड रिलीफ स्कीम’ के तहत लोन और ब्याज सब्सिडी की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को कलेक्टर कार्यालय में जिला उद्योग केंद्र के जनरल मैनेजर की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
यह बैठक सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की मांग के बाद बुलाई गई, जिसमें विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, कलेक्टर कार्यालय के अधिकारी, चैंबर के अध्यक्ष अशोक जीरावाला और पूर्व अध्यक्ष आशीष गुजराती मौजूद रहे।
बैठक में तय किया गया कि बाढ़ प्रभावित व्यापारी पहले संबंधित बैंक में लोन के लिए आवेदन कर सैंक्शन लेटर प्राप्त करेंगे। इसके बाद यह पत्र डीआईसी कार्यालय में जमा कराने पर योजना के तहत अंतिम मंजूरी दी जाएगी। लोन और ब्याज सब्सिडी पर अंतिम निर्णय डीआईसी का होगा।
सरकारी प्रावधान के अनुसार प्रभावित व्यापारियों को 30 लाख रुपये तक के लोन पर 3 वर्ष तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी मिलेगी। यदि लोन 30 लाख रुपये से अधिक या अवधि तीन साल से ज्यादा होगी, तब भी सब्सिडी केवल 30 लाख रुपये तक और अधिकतम तीन वर्षों के लिए ही लागू रहेगी।
बैठक में व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए निर्णय लिया गया कि यदि किसी के पास बाढ़ से हुए नुकसान के फोटो या वीडियो उपलब्ध नहीं हैं, तो एसजीसीसीआई , संबंधित सर्विस सोसायटी, को-ऑपरेटिव सोसायटी या व्यापारी एसोसिएशन का प्रमाणपत्र भी नुकसान के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
बैंकों से यह भी कहा गया कि यदि बाढ़ के कारण गिरवी रखी गई संपत्ति (कोलेटरल) के मूल्य में आंशिक कमी आई हो, तो भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए लोन आवेदनों पर सकारात्मक विचार किया जाए। साथ ही स्पष्ट किया गया कि इस योजना को किसी भी इंश्योरेंस क्लेम से लिंक नहीं किया जाएगा।
योजना का लाभ लेने के लिए व्यापारियों को लोन आवेदन के साथ अप्रैल, मई और जून माह के जीएसटीआर -3 बी की प्रतियां भी जमा करनी होंगी।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अहमदाबाद स्थित बैंकों की क्षेत्रीय कार्यालयों को जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि सूरत की सभी बैंक शाखाओं में योजना का एक समान क्रियान्वयन हो सके और बाढ़ प्रभावित व्यापारियों को राहत का लाभ शीघ्र मिल सके।


