गुजरात

पारूल विश्वविद्यालय के माधवबाग यूनिट में आयुर्वेदिक पंचकर्म से हृदय रोगियों को मिल रही देखभाल

पारूल आयुर्वेद रुग्णालय के माधवबाग यूनिट में मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना, आहार, योग और नियमित फॉलोअप पर जोर

हृदय की देखभाल केवल किसी एक प्रक्रिया या प्रिस्क्रिप्शन तक सीमित नहीं रहती। कई मरीजों के लिए नियमित चिकित्सकीय देखभाल, जीवनशैली प्रबंधन और सहायक उपचार उनकी स्वास्थ्य स्थिति के साथ बेहतर तरीके से जीवन जीने में मददगार हो सकते हैं। इसी दृष्टिकोण के तहत पारूल आयुर्वेद रुग्णालय के माधवबाग यूनिट में मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार योजनाएं लागू की जाती हैं। इनमें पंचकर्म, आयुर्वेदिक औषधियां, नियोजित आहार, योग, व्यायाम और अन्य थैरेपी के साथ चिकित्सकीय फॉलोअप शामिल है।

माधवबाग यूनिट का नेतृत्व डॉ. जेमिनी राठोड और डॉ. निशांत एन. पटेल कर रहे हैं। यूनिट में मरीजों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुसार आयुर्वेदिक उपचार और नियमित निगरानी की जाती है। उपचार लेने वाले मरीजों के अनुभवों के अनुसार, उन्हें अपनी स्वास्थ्य सुधार यात्रा में व्यक्तिगत आयुर्वेदिक देखभाल से लाभ महसूस हुआ।

एंजियोप्लास्टी के बाद चलने में हुई परेशानी में सुधार

जनवरी 2025 में एंजियोप्लास्टी के बाद सोमभाई वसावा को चलते समय, विशेषकर 500 से 700 मीटर चलने के बाद दर्द और भारीपन की शिकायत होती थी। उन्हें सांस फूलने की समस्या भी रहती थी और इसके चलते अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा था। उनका एलवीईएफ करीब 45 प्रतिशत था।

उपचार और नियमित फॉलोअप के बाद उन्होंने स्वास्थ्य में सुधार और चलने में सहजता महसूस होने की बात कही। इसके बाद किए गए 2D इको में एलवीईएफ करीब 50-55 प्रतिशत पाया गया। सोमभाई वसावा ने कहा कि उनका दर्द, भारीपन और सांस फूलने की समस्या काफी कम हुई तथा वे पहले की तुलना में आसानी से चलने लगे।

हार्ट अटैक के बाद आयुर्वेदिक प्रबंधन का विकल्प

फरवरी 2025 में हार्ट अटैक के बाद एंजियोग्राफी कराने वाले नरेन्द्रभाई परमार की तीन कोरोनरी आर्टरीज में काफी ब्लॉकेज पाए गए थे। उन्होंने पारूल आयुर्वेद रुग्णालय में आयुर्वेदिक प्रबंधन का विकल्प चुना।

शुरुआत में उन्हें सांस लेने में परेशानी और सीने में भारीपन रहता था, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे थे। नियमित उपचार और फॉलोअप के बाद उन्होंने सांस लेने में काफी राहत और सीने के भारीपन में कमी महसूस होने की बात कही। उनके अनुसार अब वे अपने दैनिक कार्य पहले की तुलना में आसानी से कर पा रहे हैं।

बायपास सर्जरी के बाद खेती का काम फिर शुरू किया

64 वर्षीय रमेश गन्दवानी को बायपास सर्जरी के बाद लगातार सांस लेने में परेशानी रहती थी। करीब एक वर्ष तक उन्हें खेती का काम करने में कठिनाई हुई। मई 2026 में उन्होंने आठ दिन तक उपचार लिया। इस दौरान पंचकर्म के साथ नियोजित आहार, योग और अन्य थैरेपी दी गईं। डिस्चार्ज के बाद उन्हें आयुर्वेदिक औषधियां भी दी गईं।

रमेश गन्दवानी के अनुसार उपचार के बाद उन्होंने अपनी शारीरिक क्षमता में सुधार महसूस किया और दोबारा खेती का काम शुरू किया। उन्होंने कहा, “अब फिर से मैं अपना खेती का काम कर सकता हूं और इससे मुझे खुशी मिलती है।”

आठ महीने के उपचार के बाद बेहतर महसूस करने का दावा

मार्च 2025 में हार्ट अटैक के बाद सुनीलभाई श्रीमाली को बायपास ग्राफ्टिंग की सलाह दी गई थी। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेदिक प्रबंधन का उपचार लिया। उन्हें आयुर्वेदिक औषधियां, नियोजित आहार और व्यायाम की सलाह दी गई।

करीब आठ महीने उपचार लेने के बाद उन्होंने बेहतर महसूस करने की बात कही। उनके अनुसार हाल ही में किया गया 2D इको सामान्य पाया गया। उन्होंने चिकित्सकों और पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

हृदय समस्या के साथ डायबिटीज और अस्थमा से भी जूझ रही थीं

60 वर्षीय चंचलबेन जैन को हृदय संबंधी समस्या के साथ डायबिटीज और अस्थमा भी था। उन्हें सांस लेने में परेशानी और पैरों में सूजन की शिकायत रहती थी, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। उपचार के दौरान मसाज, स्टीम थैरेपी, एनेमा थैरेपी, योग और व्यायाम सहित विभिन्न उपचारों को शामिल किया गया।

उपचार के बाद उन्होंने सांस लेने में सुधार और पैरों की सूजन में कमी महसूस होने की बात कही। उनके अनुसार अब वे रोजमर्रा के काम पहले की तुलना में बेहतर तरीके से कर पा रही हैं।

एक महीने के उपचार के बाद दैनिक गतिविधियों में सुधार

अस्थमा, डायबिटीज और किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे रमेशभाई वसावा को सांस लेने में परेशानी के कारण चलने-फिरने में काफी कठिनाई होती थी। वे 100 मीटर भी आसानी से नहीं चल पाते थे। उन्हें करीब एक महीने तक अस्पताल में रखकर पंचकर्म और अन्य आयुर्वेदिक उपचार दिए गए। इसके बाद भी सात दिनों तक उपचार जारी रखा गया।

उपचार, नियमित दवाइयों और दक्षिण अफ्रीका से ऑनलाइन परामर्श के बाद उन्होंने अपने लक्षणों और दैनिक गतिविधियों में सुधार महसूस होने की बात कही। उपचार पूरा होने के बाद भी वे दक्षिण अफ्रीका से दवाइयां और ऑनलाइन परामर्श ले रहे हैं। उन्होंने चिकित्सकों और पारूल आयुर्वेद रुग्णालय की टीम के प्रति आभार जताया।

नियमित फॉलोअप और व्यक्तिगत उपचार जरूरी : डॉ. कोमल पटेल

पारूल विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट (मेडिकल एवं पैरामेडिकल हेल्थ सर्विसेज) और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. कोमल पटेल ने कहा कि हृदय स्वास्थ्य में सुधार के लिए निरंतर देखभाल, नियमित फॉलोअप और व्यक्तिगत उपचार महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि पारूल आयुर्वेद रुग्णालय में मरीजों की जरूरत के अनुसार आयुर्वेदिक उपचार, पंचकर्म, आहार संबंधी सलाह, योग और जीवनशैली प्रबंधन को उपचार योजना में शामिल किया जाता है। मरीजों के अनुभव बताते हैं कि निरंतर देखभाल और उपचार के दौरान निगरानी का महत्व काफी अधिक है।

पारूल आयुर्वेद रुग्णालय के माधवबाग यूनिट में पंचकर्म के साथ आयुर्वेदिक औषधियां, विभिन्न थैरेपी, आहार और योग को मरीजों की आवश्यकता के अनुसार उपचार योजना में शामिल किया जाता है। अस्पताल से छुट्टी के बाद भी आवश्यकतानुसार फॉलोअप, निगरानी और सहायता जारी रखी जाती है।

 

 

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