धर्म- समाज

महातपस्वी महाश्रमण की महाघोषणा : मुख्यमुनि महावीर को बनाया युवाचार्य

आगे बढ़ी तेरापंथ की परंपरा, युगप्रधान अनुशास्ता ने भावी उत्तराधिकारी की कर दी घोषणा

लाडनूं :  जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता, महामना भिक्षु स्वामी की जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के सम्पन्नता के अवसर पर महामना आचार्यश्री भिक्षु के परंपर पट्टधर, तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने जैन विश्व भारती में बने भव्य एवं विशाल सुधर्मा सभा में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ के सम्मुख तेरापंथ की परंपरा को एक कदम और आगे बढ़ाते हुए मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में घोषित करते हुए युवाचार्य के पद पर प्रतिष्ठित कर दिया। इस घोषणा के साथ ही मानों पूरा वातावरण जय निंनादों से गुंजायमान हो उठा। चतुर्विध धर्मसंघ को इस अवसर पर ऐसा अमूल्य उपहार प्रदान कर मानों युगप्रधान अनुशास्ता ने कृतार्थ बना दिया।

तेरापंथ की राजधानी के रूप में विख्यात राजस्थान का लाडनूं शहर, जिसे तेरापंथ धर्मसंघ में नवमें आचार्यश्री तुलसी के जन्मस्थान होने का भी गौरव प्राप्त है। जहां जैन विश्व भारती के रूप में सुरम्य परिसर भी उपलब्ध है, जहां तेरापंथ धर्मसंघ के पहले योगक्षेम वर्ष की आयोजना हुई और वर्तमान समय में भी तेरापंथ धर्मसंघ का दूसरा योगक्षेम वर्ष भी यहीं आयोजित हो रहा है। तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में बृहद् संख्या में चारित्रात्माओं की उपस्थिति भी है।

सोमवार का दिन मानों सम्पूर्ण तेरापंथ धर्मसंघ के लिए किसी स्वर्णिम दिवस से कम न था। इस स्वर्णिम दिन और स्वर्णिम सुअवसर को वर्तमान अधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री ने और सुनहरे अवसर के रूप में परिवर्तित कर दिया जब युगप्रधान अनुशास्ता ने महामना भिक्षु स्वामी के जन्म दिवस व बोधि दिवस के दौरान अपने मंगल उद्बोधन में पावन पाथेय प्रदान करने के उपरान्त घोषणा करते हुए कहा- भगवान महावीर को नमन। महामना आचार्यश्री भिक्षु स्वामी व पूर्वाचार्यों को श्रद्धायुक्त नमन। आचार्यश्री भिक्षु ने जो मर्यादा, व्यवस्था दी। अतीत में आचार्य दशक सम्पन्न हुआ। आचार्यश्री तुलसी व आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने मुझे पर ध्यान दिया मुझे दायित्व दिया, उसे मैं अब तक निभाता आ रहा हूं, आगे भी निभाता रहूंगा। आज के अवसर पर मैं अपने उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा करना चाहता हूं। आचार्यश्री तुलसी और आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के नैकट्य में रहने का सुअवसर प्राप्त हुआ। साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी के सामने मैं बालमुनि के रूप में भी रहा, बाद में व्यवस्थाओं की दृष्टि से भी सम्पर्क रहा। वर्तमान में साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी, साध्वीवर्या और मुख्यमुनि महावीरकुमार भी व्यवस्था पक्ष से जुड़े हुए हैं। शासना की दृष्टि से हमारे धर्मसंघ में एक आचार्य की परंपरा चली आ रही है। यह परंपरा आगे भी चलती रहे, स्वस्थ परंपरा आगे चलती रहे, उसके लिए एक नेतृत्व की व्यवस्था चलती रहे। हमारे धर्मसंघ में एक आचार्य का नेतृत्व रहता है।

आचार्यश्री ने पूर्वाचार्यों की नियुक्ति प्रक्रियाओं का वर्णन करते हुए कहा कि हमारा जैन श्वेताम्बर तेरापंथ समुदाय है। वर्तमान आचार्य का यह दायित्व है कि वर्तमान के साथ भविष्य की व्यवस्था पर भी ध्यान दे। मैं उस परंपरा का निर्वाह करते हुए कहना चाहता हूं- आओ मुनि महावीर! आचार्यश्री ने युवाचार्य नियुक्ति पत्र को दिखाते हुए उस पत्र की भाषा का वाचन करते हुए कहा कि मैं आचार्य महाश्रमण अपने सुशिष्य मुनि महावीरकुमार को अपने उत्तराधिकारी के रूप में युवाचार्य पद पर नियुक्त करता हूं और शुभाशंसा करता हूं कि यह अध्यात्म निष्ठा, अनुशासन, विनम्रता और कौशलपूर्ण कार्यशैली से भिक्षु शासन की गरिमा को बढ़ाता रहे। इस घोषणा के साथ ही पूरा आसमान जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इसके साथ ही मानों महामना भिक्षु की परंपरा को युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने एक कदम और आगे बढ़ा दिया।

आचार्यश्री ने परंपरानुसार नवनियुक्त युवाचार्यश्री महावीरकुमारजी को अपने हाथों से उत्तरीय ओढ़ाते हुए कहा कि ये आचार्यश्री भिक्षु की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहें। आचार्यश्री द्वारा अमल-धवल चद्दर ओढ़े नवनियुक्त युवाचार्यश्री महावीरकुमारजी ने अपने प्रथम उद्बोधन में कहा कि परम पूज्य स्वामीजी के जन्मदिवस के पावन अवसर समस्त पूर्वाचार्यों को नमन-वंदन करता हूं। भगवान महावीर के इस जिन शासन व तेरापंथ धर्मसंघ की यह परंपरा चल रही है। परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी की यह जन्मधरा है, जिनका मुझे भी बाल्यकाल में दर्शन का सुअवसर प्राप्त हुआ। मेरे उपकारी आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने मेरे जीवन को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने मेरे विकास के लिए बहुत प्रयत्न किया। मेरे परम उपकारी आचार्यश्री महाश्रमणजी, जिनके उपकारों मैं कभी उऋण नहीं हो सकता। बचपन से ही दीक्षा लेने के बाद मुझे आपश्री की सेवा में रहने का अवसर मिला। मेरा स्वाध्याय सुना करते थे। आपकी सेवा का अवसर प्राप्त होना मेरे जीवन की अमूल्य धरोहर है। आपने मुझे विराटनगर में मुख्यमुनि अलंकरण प्रदान किया तो असम के बरपथार में वर्ष 2016 में मुख्यमुनि पद प्रदान किया था। मैं तो अबोध बच्चा था। आप जैसे महापुरुषों की परम कृपा का प्रसाद मानता हूं कि मैं आज कुछ बोल और कर पाता हूं। आज मैं आपसे आशीर्वाद चाहता हूं कि आपके वरद की छत्रछाया सुदीर्घकाल तक प्राप्त होती रहे। मैं भारमलजी के युवाचार्यकाल को भी अतिक्रांत करूं आपकी पावन छत्रछाया में शिक्षण औ संबल प्राप्त करता रहूं। मेरे मन में आपके प्रति अत्यंत भक्ति का भाव है। आप द्वारा ओढ़ाई गई अमल-धवल चद्दर की शान को आगे बढ़ाता रहूं। मुख्यमुनिश्री ने आज के दिन अपने संसारपक्षीय माता-पिता के उपकारों का भी वर्णन किया। युवाचार्यश्री ने एक गीत का भी संगान किया।

तदुपरान्त साध्वीप्रमुखाजी विश्रुतविभाजी, साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी, मुनि धर्मरुचिजी, समणी नियोजिका मधुरप्रज्ञाजी, जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष श्री महेन्द्र नाहटा व अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती सुमन नाहटा ने युवाचार्यश्री की वर्धापना में अपनी अभिव्यक्ति देते हुए मंगलकामना की। साध्वीवृंद और संतवृन्द ने भी युवाचार्यश्री की वर्धापना मंे गीत का संगान किया।

इस दौरान आचार्यश्री ने युवाचार्य वर्धापना समारोह के आयोजन की घोषणा करते हुए 30-31 जुलाई को उसे आयोजित करने की बात भी बताई। आचार्यश्री ने मुमुक्षु कनिष्का व मुमुक्षु प्रियंका तथा मुमुक्षु लकित सेठिया को साधु प्रतिक्रमण सीखने की स्वीकृति प्रदान की। इस दौरान बोधार्थी बालिका सिद्धि ने अपनी बालसुलभ अभिव्यक्ति दी तो आचार्यश्री ने बोधार्थी सिद्धि को भी साध्वी प्रतिक्रमण सीखने की स्वीकृति प्रदान कर दी। संघगान के साथ कार्यक्रम सुसम्पन्न हुआ।

इसके पूर्व आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष की सम्पन्नता समारोह व बोधि दिवस के संदर्भ में तीन साध्वीवृंद व तीन समणीवृंद ने संयुक्त रूप से ‘भिक्षु म्हारै प्रकट्याजी भरत खेतर में’ गीत का संगान किया। तदुपरान्त तीन संतों ने ‘सुगुरु को वंदन शत-शत बार’ गीत का संगान किया। तेरापंथ समाज-लाडनूं ने गीत का संगान किया। योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति-लाडनूं के अध्यक्ष श्री प्रमोद ने अपनी अभिव्यक्ति दी। तदुपरान्त साध्वीवृन्द व संतवृन्द ने गीत के माध्यम से महामना भिक्षु स्वामी की अभिवंदना की। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष श्री महेन्द्र नाहटा ने अपनी अभिव्यक्ति दी।

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