
सूरत। गुजरात में बारिश की कमी के कारण पैदा हुई पानी की चिंता के बीच मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राहत की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य में एक साल के लिए पानी की जितनी कमी है, उसे दूर करने का भरोसा मिला है। मंगलवार को इस संबंध में सभी मुद्दों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने भी कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में बिजली के बदले पानी उपलब्ध कराने के मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने रविवार को सूरत में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने गुजरात में पानी की कमी दूर करने का भरोसा दिया है। मंगलवार को होने वाली बैठक के बाद इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

सीआर पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में मंगलवार को तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक होगी। इसमें पानी की उपलब्धता और बिजली के बदले पानी देने के मुद्दे पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुजरात में पानी की कमी दूर करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
जल संचयन के प्रयासों की सराहना
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत सूरत में किए जा रहे जल संचयन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शहर ने जल संरक्षण के क्षेत्र में अच्छा काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप शहरों को स्वच्छ, हरित और बेहतर सुविधाओं वाला बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सूरत को तेजी से विकसित होने वाले और स्वच्छता में अग्रणी शहरों में शामिल बताते हुए विकसित गुजरात और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया।
सीआर पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देशभर में वर्षा जल संचयन के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहा है। उनके अनुसार, जल संचयन संरचनाओं के माध्यम से देश में करीब 1.55 करोड़ लीटर वर्षा जल बचाया जा रहा है। गुजरात और सौराष्ट्र में भी इस दिशा में उल्लेखनीय काम हुआ है।
एसटीपी से पानी के पुनः उपयोग पर जोर
पाटिल ने सूरत महानगरपालिका के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़े प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मनपा ने एसटीपी के नए संयंत्र विकसित कर बड़े खर्च की बचत की है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में पानी की स्थिति दूसरे राज्यों की तुलना में बेहतर है। इसके बावजूद राज्य की जरूरतों को पूरा करने और पानी की कमी दूर करने के लिए दूसरे राज्यों से पानी उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।



