
साकेत ग्रुप और स्टीम हाउस की पहल : शेल्टर होम के बच्चों और बुजुर्गों ने देखी ‘हनुमान अंश’, चेहरे पर दिखी खुशी
बस से सिनेमा हॉल पहुंचे बच्चे और बुजुर्ग; कुछ घंटों के लिए बदली रोजमर्रा की दुनिया
सूरत। साकेत ग्रुप और स्टीम हाउस की ओर से बुधवार को डुमस रोड स्थित सिटी प्लस सिनेमा में शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष फिल्म स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। बच्चों और बुजुर्गों को बस के माध्यम से शेल्टर होम से सिनेमा हॉल तक लाया गया। सिनेमा हॉल पहुंचते ही उनके चेहरों पर उत्साह और खुशी साफ नजर आई।
इस दौरान सभी ने फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का अनुभव बच्चों के लिए खास रहा। फिल्म शुरू होने से पहले ही बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया। उनके लिए यह केवल फिल्म देखने का अवसर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से अलग कुछ पल खुशी और मनोरंजन के साथ बिताने का मौका था।

बच्चों को भी मिले सामान्य बचपन के अनुभव
साकेत ग्रुप और स्टीम हाउस के फाउंडर सांवर प्रसाद बुधिया ने बताया कि शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों को फिल्म दिखाने का विचार केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था। उद्देश्य था कि बच्चों के चेहरों पर ऐसी खुशी लाई जाए, जो उन्हें रोजमर्रा के जीवन में शायद कम ही अनुभव होती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन आमतौर पर खिलौने, स्कूल, दोस्त और सिनेमा जैसी यादों से जुड़ा होता है। शेल्टर होम में रहने वाले हर बच्चे को ये अनुभव समान रूप से मिलें, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में विचार आया कि इन बच्चों को भी वही अनुभव दिया जाए, जो दूसरे बच्चों के लिए सामान्य जीवन का हिस्सा है।
‘हनुमान अंश’ के जरिए साहस और संस्कार का संदेश
सांवर प्रसाद बुधिया ने कहा कि ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्म बच्चों के लिए मनोरंजन के साथ साहस, विश्वास, अच्छाई और संस्कारों से जुड़ी भावनाएं भी लेकर आती है। इसलिए बच्चों के साथ यह फिल्म देखने का निर्णय लिया गया, ताकि उन्हें कुछ घंटों के लिए अपनी परिस्थितियों से दूर खुशी और सकारात्मकता से भरी दुनिया का अनुभव कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि उद्देश्य सिर्फ बच्चों को फिल्म दिखाना नहीं, बल्कि उन्हें यह एहसास दिलाना है कि उनकी खुशियां भी महत्वपूर्ण हैं और उनके सपने भी उतने ही खूबसूरत हैं। समाज में उनके लिए भी समान रूप से जगह और सम्मान है।

एक टिकट और कुछ घंटों की खुशी
साकेत ग्रुप की इस पहल के दौरान बच्चों और बुजुर्गों के चेहरों पर नजर आई खुशी ने आयोजन को खास बना दिया। आयोजकों के अनुसार, किसी बच्चे को खुश करने के लिए हमेशा बड़ी चीज की जरूरत नहीं होती। सिनेमा की टिकट, अल्पाहार और बड़े पर्दे पर कहानी देखने का अनुभव भी उनके लिए यादगार बन सकता है।
इस अवसर पर साकेत ग्रुप और स्टीम हाउस के सदस्य मौजूद रहे और बच्चों व बुजुर्गों के साथ समय बिताया।



