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सूरत में निर्मित AM/NS India का स्टील INS मांगरोल की ताकत बना

सूरत की विनिर्माण उत्कृष्टता भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को दे रही है मजबूती

हजीरा-सूरत, अक्टूबर 26, 2026: भारतीय नौसेना में हाल ही में शामिल किए गए एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS मांगरोल का सूरत से गहरा संबंध है। इस युद्धपोत का निर्माण आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AM/NS India) की हजीरा स्थित इकाई द्वारा आपूर्ति किए गए 100% विशेष स्टील से किया गया है।

INS मांगरोल को अक्टूबर 12,2026 को मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना की सेवा में शामिल किया गया। यह उपलब्धि सूरत के लिए गर्व का एक और अवसर है। यह दर्शाती है कि हजीरा में विकसित विश्वस्तरीय विनिर्माण क्षमताएं किस तरह राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में योगदान दे रही हैं। महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से लेकर रक्षा क्षेत्र के अहम प्लेटफॉर्म तक, हजीरा में निर्मित स्टील भारत के विकास और सामरिक लक्ष्यों को पूरा करने में लगातार सहयोग कर रहा है।

यह उपलब्धि सूरत को एक और राष्ट्रीय गौरव के केंद्र में स्थापित करती है। हजीरा में निर्मित स्टील भारत की स्वदेशी नौसैनिक जहाज निर्माण क्षमताओं को मजबूत बनाने में मदद कर रहा है। देश जब ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब INS मांगरोल जैसी सामरिक महत्व की परियोजनाओं में हजीरा का योगदान राष्ट्र निर्माण और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने में सूरत की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

विशेष बात यह है कि इस युद्धपोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय शहर और प्रमुख मछली पकड़ने के बंदरगाह मांगरोल के नाम पर रखा गया है। इस तरह, AM/NS India की हजीरा इकाई में निर्मित 100% विशेष स्टील से तैयार इस युद्धपोत का गुजरात से एक विशेष जुड़ाव भी है।

श्री रंजन धर, डायरेक्टर एवं वाइस प्रेसिडेंट – सेल्स एंड मार्केटिंग, AM/NS India ने कहा, “INS मंगरोल का नौसेना में शामिल होना हमारी हजीरा इकाई और सूरत के लिए गर्व का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस युद्धजहाज के लिए आपूर्ति किया गया विशेष स्टील हजीरा में विकसित उन्नत विनिर्माण क्षमताओं, तकनीकी विशेषज्ञता और गुणवत्ता मानकों को दर्शाता है। हमें गर्व है कि सूरत में निर्मित स्टील भारत की रक्षा तैयारियों और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने में योगदान दे रहा है।”

INS मांगरोल भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला माहे-क्लास का तीसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ निर्मित यह पोत ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, यह स्वदेशी युद्धपोतों के डिजाइन, निर्माण और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण में भारत की बढ़ती क्षमताओं को भी प्रदर्शित करता है।

पनडुब्बी रोधी युद्ध, पानी के भीतर निगरानी और तटीय सुरक्षा अभियानों के लिए तैयार INS मांगरोल भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने तथा तटीय जलक्षेत्रों में समुद्री गतिविधियों की निगरानी और जागरूकता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
AM/NS India भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे 8 ASW-SWC पोतों के पूरे बेड़े के लिए आवश्यक 100% विशेष स्टील की आपूर्ति कर रही है। कंपनी INS विशाखापटनम, INS सूरत और INS मालवन सहित कई महत्वपूर्ण नौसैनिक प्लेटफॉर्म के लिए भी विशेष स्टील की आपूर्ति कर चुकी है।

रक्षा क्षेत्र के अलावा, हजीरा में निर्मित स्टील ने भारत की कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी योगदान दिया है। इनमें चिनाब रेलवे ब्रिज, अंजी खड्ड रेलवे ब्रिज, बोगीबील ब्रिज और भारत स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला शामिल हैं।

भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने से लेकर देश की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सक्षम बनाने तक, ये सभी उपलब्धियां राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास की प्राथमिकताओं को पूरा करने में हजीरा में निर्मित स्टील की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती हैं। साथ ही, ये राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र निर्माण में सूरत के महत्वपूर्ण योगदान को भी प्रदर्शित करती हैं।

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