धर्म- समाज

25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी एवं मुख्य गणपति विसर्जन

 विसर्जन आस्था है, गंदगी नहीं श्रद्धा के साथ देव-मर्यादा और प्रकृति का सम्मान भी जरूरी

सूरत। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर मुख्य गणपति विसर्जन किया जाएगा। वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ गोविंद मुंदड़ा के अनुसार गणपति विसर्जन केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धापूर्वक पूजित देवस्वरूप को सम्मान एवं मर्यादा के साथ विदा करने की धार्मिक परंपरा है।

विसर्जन के शुभ मुहूर्त

शुभ चौघड़िया के अनुसार चर, लाभ एवं अमृत प्रातः 6:11 से 10:42 बजे तक, शुभ चौघड़िया दोपहर 12:13 से 1:43 बजे तक तथा चर चौघड़िया शाम 4:44 से 6:14 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:48 से 12:37 बजे तथा विजय मुहूर्त दोपहर 2:13 से 3:01 बजे तक रहेगा।

विसर्जन का धार्मिक महत्व

गणपति प्रतिमा का प्रकृति में पुनः विलीन होना सृजन और विसर्जन के शाश्वत चक्र का प्रतीक माना जाता है। एक प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार महर्षि वेदव्यास जब महाभारत का कथन कर रहे थे और भगवान गणेश उसे निरंतर लिख रहे थे, तब लगातार लेखन से गणेशजी के शरीर में अत्यधिक उष्णता उत्पन्न हुई। उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए मिट्टी के लेप एवं जल का सहारा लिया गया। इस मान्यता को भी गणपति विसर्जन की परंपरा से जोड़ा जाता है।

गणपति स्वयं पंचमहाभूतों के स्वरूप

गणपति अथर्वशीर्ष में कहा गया है“त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः।” अर्थात भगवान गणेश पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश स्वरूप हैं। ऐसे में गणपति उत्सव और विसर्जन के नाम पर जल को प्रदूषित करना, भूमि पर कचरा फैलाना और प्रकृति को नुकसान पहुँचाना धार्मिक भावना के विपरीत है।

ज्योतिषीय परंपरा में जल का संबंध चंद्रमा तथा भूमि का संबंध मंगल से माना जाता है। इसलिए जल एवं भूमि की शुद्धता और सम्मान बनाए रखना धार्मिक एवं सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

विसर्जन के समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

पूजित प्रतिमा एवं उसके अवशेषों की मर्यादा बनाए रखें। प्लास्टिक, थर्माकोल, कपड़े, केमिकलयुक्त सजावट और अन्य कचरा जल में न डालें। फूल-माला एवं पूजन-सामग्री को अलग एकत्र कर सम्मानपूर्वक उचित स्थान पर दें। निर्धारित विसर्जन स्थल अथवा कृत्रिम कुंड का उपयोग करें और विसर्जन के बाद आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने में सहयोग करें।

जुलूस के दौरान अत्यधिक शोर, यातायात में अनावश्यक बाधा और आम लोगों को परेशानी से भी बचना चाहिए। धार्मिक उत्सव का आनंद ऐसा हो जिसमें दूसरों की सुविधा और सामाजिक व्यवस्था का भी सम्मान बना रहे।

जिस बप्पा को श्रद्धा से पूजा, उनकी विदाई भी उसी सम्मान से करें”

मुंदड़ा ने कहा कि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ विघ्नराज भी कहा गया है। दस दिनों तक जिस प्रतिमा को भगवान मानकर पूजा, आरती और भोग लगाया जाए, विसर्जन के बाद उसी पूजित स्वरूप का अनादर, जल का प्रदूषण और भूमि पर गंदगी हमारी आस्था के मूल भाव से मेल नहीं खाती।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि “विसर्जन के साथ हमारी धार्मिक जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। जिस श्रद्धा और सम्मान से बप्पा को घर लाएँ, उसी श्रद्धा, स्वच्छता और देव-मर्यादा के साथ उन्हें विदा करें। विसर्जन आस्था है, गंदगी नहीं।”

गोविंद मुंदड़ा , वैदिक ज्योतिष  एवं वास्तु विशेषज्ञ, भाग्यद्रष्टा एस्ट्रो वास्तु प्राइवेट लिमिटेड

नोट: अलग-अलग पंचांग एवं स्थान के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर संभव है।

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